Phase 1: ग़ुस्सा, टूटन, इल्ज़ाम यहाँ प्रेम अभी मरा नहीं है, इसलिए दर्द शोर करता है।वक़्त का पहला सच—जब धोखा…
मत ढूँढ मेरा किरदार इस भीड़ के शोर में,वफ़ादार अकेले मिलते हैं तन्हाई के दौर में। चेहरों की रौनक़ों में…
कुछ रिश्ते ज़हर की तरह रगों में उतरते हैं,फिर भी उन्हें उम्र भर निभाना ज़रूरी होता है। मैंने जिसे रूह…
देवू उस दिन भी वैसे ही साइकिल चला रहा था, जैसे हर दिन चलाता था। न ज़्यादा तेज़। न ज़्यादा…
ख्वाब आंखों में लेकरचलता रहा हर राह परऔऱ वो ख्वाब में आ, मेरी राह मंजिल कर गया। सोचा करता था…