तुम आधा सच बड़े सलीक़े से कहती हो, हर झूठ को सच की सूरत में ढाल देती हो। मैंने जो…
मैं वो शख़्स था जो ख़ुद से भी छुपा रहता था, ख़ामोशी के मलबे में अपना घर बना लिया। रूहानियत…
तुम मिले ज़रूर इत्तेफ़ाक़ से, मगर बिछड़ना लिखा था—अपनी मर्ज़ी से। हवा में घुली थी तुम्हारी ख़ुशबू, दिल लुटा बैठा…
वो बोली - अब बदल गए हैं मेरे मेयार-ए-मोहब्बत, न रहे वो जज़्बात, न बची है कोई चाहत। कहा -…
नाराज़गी भी मोहब्बत की एक अदा थी, हर रूठने में तेरी क़ुर्बत की सदा थी। लफ़्ज़ उलझे हुए थे तो…