अदालत-ए-दिल
By Lokesh Bhardwaj / January 26, 2026 / No Comments / Poetries
Phase 1: ग़ुस्सा, टूटन, इल्ज़ाम
यहाँ प्रेम अभी मरा नहीं है, इसलिए दर्द शोर करता है।
वक़्त का पहला सच—जब धोखा सवाल बन जाता है और मोहब्बत कटघरे में खड़ी होती है।

मेरे जो भी गुनाह हैं उनकी सज़ा दो मुझे,
लेकिन मेरा गुनाह क्या है यह भी बता दो मुझे।
वो रातें याद हैं जब हाथों पे सजाती थी महंदी,
अब बेवफ़ाई की दास्तां सुना दो मुझे।
मैंने हर दुआ में सिर्फ़ तेरा ही नाम लिखा,
उस जुर्म की ख़ातिर यूँ बेनाम बना दो मुझे।
वो ख़ामोश लम्हे, वो हथेलियों का सुकून,
उन्हीं बेरहम यादों में फिर से जला दो मुझे।
मैंने तुझसे कुछ चाहा ही नहीं था कभी,
इस वफ़ा का सिला यूँ दगा दो मुझे।?
वो सर्द रातें जब बाँहों में समाया करता था,
अब ग़ैर की बाँहों का किस्सा बता दो मुझे।
इतनी बेदर्द निकली कि लम्हों को भूल गई,
कैसे भुला दिया सब, वो हुनर सिखा दो मुझे।
इतनी आसानी से तू पत्थर सी कैसे हुई,
ज़रा सा आईना रखकर ख़ुदा दिखा दो मुझे।
Phase 2: तलाक़, सवाल, अधूरे ख़्वाब
यह वो मुक़ाम है जहाँ रिश्ता क़ानून बन जाता है।
ख़्वाब काग़ज़ों में बदलते हैं और प्यार दस्तख़तों में सिमट जाता है।

हमने जो उम्र भर साथ जीने के ख़्वाब बुने,
उन टूटे ख़्वाबों का हिसाब ज़रा जता दो मुझे।
वो छोटा सा घर, वो तेरा मेरा कल,
किस मोड़ पे छोड़ा ये भी बता दो मुझे।
तलाक़ की मेज़ पर जब दस्तख़त रखे हमने,
मेरे काँपते हाथों का दर्द दिखा दो मुझे।
मैंने तो रिश्ता निभाया इबादत समझ के,
तुम्हारी मोहब्बत थी या कोई अदा, बता दो मुझे।
अगर मैं ही कसूरवार हूँ इस कहानी में,
तो अदालत-ए-दिल में सबूत दिखा दो मुझे।
Phase 3: स्वीकार, आगे बढ़ना, माफ़ी
अब लड़ाई किसी और से नहीं, ख़ुद से होती है।
सवाल ख़त्म हो जाते हैं, और इंसान पहली बार आज़ाद साँस लेता है।

अब शिकायत नहीं, न कोई मलाल बाकी है,
जो था सो था, अब बस रिहाई अदा दो मुझे।
मैंने उस इंसान से नहीं, उसके किरदार से प्यार किया,
वो बेवफ़ा निकला तो क्या, किरदार की वफ़ा दो मुझे।
तू किसी और की तक़दीर लिखने चली गई,
मैंने ख़ुद को फिर से पढ़ लिया, नया पता दो मुझे।
अब तुझसे कोई सवाल, कोई सज़ा नहीं माँगता,
बिन माँगे ही माफ़ी की एक दुआ दो मुझे।
मैं आगे बढ़ गया हूँ, किसी और उजाले की तरफ़,
तू भी खुश रहे, मैं भी, बस इतनी दुआ दो मुझे।
अव्यक्त अब शिकवा नहीं करता उस कहानी से,
मेरा गुनाह क्या है, बस इतना समझा दो मुझे।